राम जाति धर्म सूचक नहीं हैं... प्रेरणा है ,आदर्श है ,संपूर्ण जीवन है।

पहली बात यह है कि राम किसी की जाति या धर्म के सूचक नहीं हैं। पहले वे एक मनुष्य से रूप मर राम होकर , पुरुषार्थ के बल पर जनता के आदर्श राम बने हैं।

राम जाति धर्म सूचक नहीं हैं... प्रेरणा है ,आदर्श है ,संपूर्ण जीवन है।

पहली बात यह है कि राम किसी की जाति या धर्म के सूचक नहीं हैं।
पहले वे एक मनुष्य से रूप मर राम होकर , पुरुषार्थ के बल पर जनता के आदर्श राम बने हैं।
उनके राम से श्री राम बनने के विवरण को कौन नहीं जानता ??
वे जीवन जीने की प्रेरणा हैं।
यदि वे हिंदुओं के आस्था का प्रतीक हैं।
हमारे आराध्य हैं।
तो हिंदुस्तान में किसी को इस बात से तकलीफ नहीं होनी चाहिए।
क्योंकि राम हिंद की पावन धरा अयोध्या में जन्में हैं।
गांव गांव ढाणी ढाणी में वन वास के दौरान रहे हैं।
ये हम से पहले उनकी जनम भूमि हैं।

उनके साथ कौन न था??
बताइए वे किसके साथ नहीं थे??
उनकी सेना में कौन नहीं था??
किसके साथ राम ने इंसाफ नहीं किया??

राम तो सबके प्रेरणा स्त्रोत हैं।
फिर एलजी द्वारा किसी कार्यक्रम में राम की जय जयकार कहने से राजनीति हो जाती हैं??
बंटवारा हो जाता हैं क्या ??

जो राम को मानते नहीं वे जानेंगे भी कैसे??
ये हिंदू प्रतीक चिन्ह नहीं हैं।
पारिवारिक जीवन से लेकर धर्म परायण रहते हुए अधर्म को ख़तम करने वाले राम है जो हमें जीवन जीना सिखाते हैं।
फिर यह केवल हिंदुओं के हो यह असम्भव है।
किसी भी मुद्दे में राम नाम आते ही उसको तोड़िए मरोडिए नहीं।
हालही ही में  मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल का एक शासकीय कार्यक्रम में मंच से उद्घोष... रहा जय श्री राम।
वंदे मातरम्।

वे आज सुबह आगर मालवा जिले के भ्रमण पर थे।
तब यह वाकिया हुआ।
फिर इसे राजनीतिक करार देना कहा तक उचित है???

पूजा बाथरा
मोटिवेश्नल लेखिका राष्ट्रीय पत्रकार नई दिल्ली

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