मेरी कलम से..........

मेरी कलम से..........

जिस प्रकार धर्म के रास्ते में , जगह जगह
निशुल्क भोजन, निशुल्क जल, निशुल्क सेवा दी जाती हैं
वैसे ही शिक्षा के रास्ते में भी
भारत के भविष्य को सुविधाएं मिलनी चाहिए
पुस्तकें, गणवेश,शुल्क,सहयोग आदि

ओर जिन्हें मेरी बातें न समझ आए वे भगवान् परशुराम जी को पढ़े, वे महाभारत के प्रत्येक अध्याय के लिए श्रीमद् गीता जी पढ़े, तमाम ऋषियों को पढ़े जो सदैव धर्म से पहले व्यक्ति के शिक्षित और ज्ञानी होने पर बल देते रहे।

आज भी समानता के नाम पर असमानता जारी है।
हम में से कौन है ऐसा जिसे समान शिक्षा मिली हैं??
पढ़ाया ज़रूर समान जाता हैं मगर उस बच्चे के जीवन में वह ज्ञान उसी के विवेक के आधार पर पहुंच पाता है।
हमें उस शिक्षा की जरूरत हैं।
जो सबको समान रूप से शिक्षित करें।

आज के दौर की तरह नहीं, कि जिन प्रतिनिधियों को जनता चुनती हैं उनके बच्चे विदेशों में पढ़े ओर भारत के वासियों के बच्चे शिक्षा के व्यापारि करण के साथ साथ ऊंच नीच, सरकारी ओर प्राइवेट का दंश झेले।

मैं आज भी उस गुरुकुल शिक्षा की बात करती हूं जो एक नागरिक को, ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य ओर शूद्र हर वर्ग का ज्ञान सिखाती हैं।
इन वर्णों में बांटती नहीं बल्कि इन सभी का समावेश एक ही व्यक्तित्व में करती हैं जो उसे समय आने पर काम आए।
यहीं गुरुकुल परम्परा,गुरुकुल शिक्षा हैं।

पूजा बाथरा
वरिष्ठ पत्रकार
जय श्री कृष्णा
जय हिंद

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